New Delhi, 30 अगस्त . मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि त्योहारी सीजन और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से आगामी तिमाहियों में घरेलू मांग बढ़ सकती है.
उन्होंने कहा कि 27 अगस्त को लगाए गए 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न अनिश्चितताओं के कारण आर्थिक गतिविधियों, विशेष रूप से निर्यात और पूंजी निर्माण के लिए अल्पकालिक जोखिम बने हुए हैं.
नागेश्वरन ने कहा कि पर्याप्त घरेलू खपत प्राइवेट प्लेयर्स को चुनौतीपूर्ण समय में भी निवेश जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी.
जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद, जिसमें जून तिमाही में उम्मीद से अधिक 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई है, नागेश्वरन ने कहा कि इस वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6.3-6.8 प्रतिशत के लक्षित दायरे में रहने की उम्मीद है, जैसा कि इस साल की शुरुआत में आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया था.
उन्होंने अमेरिकी टैरिफ पर चिंताओं के बावजूद, इस वृद्धि दर के आंकड़े में किसी भी संशोधन से इनकार किया.
उन्होंने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ के सटीक प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी.”
वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विनिर्माण, निर्माण और सेवाओं ने आपूर्ति-पक्ष की वृद्धि को बढ़ावा दिया.
निजी अंतिम उपभोग व्यय में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे मांग-पक्ष की वृद्धि को बल मिला.
सरकार के पूंजीगत व्यय ने भी निवेश वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
जून में समाप्त तीन महीनों के लिए सकल घरेलू उत्पाद में निजी उपभोग का हिस्सा 15 वर्षों में उस तिमाही के लिए सबसे अधिक था.
सीईए नागेश्वरन के अनुसार, जुलाई के उच्च-आवृत्ति संकेतक संकेत देते हैं कि जून तिमाही से आर्थिक गति जारी है.
लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, भारत न केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, बल्कि अन्य देशों के साथ अंतर भी बढ़ा है.
जून तिमाही में चीन ने 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की, उसके बाद इंडोनेशिया ने 5.1 प्रतिशत, अमेरिका ने 2.1 प्रतिशत, जापान और ब्रिटेन ने 1.2-1.2 प्रतिशत और फ्रांस ने 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की.
एसबीआई रिसर्च की इस महीने की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में संकेत दिया गया था कि 5.5 लाख करोड़ रुपए की खपत वृद्धि से वित्त वर्ष 26 में जीएसटी राजस्व में 52,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वृद्धि होगी, जो जीएसटी 2.0 सुधारों से होने वाले 45,000 करोड़ रुपए के अनुमानित राजस्व नुकसान की आसानी से भरपाई कर देगा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी 2.0 सुधारों से खपत में वृद्धि हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप कर राजस्व में वृद्धि, मुद्रास्फीति में कमी और विकास दर में वृद्धि हो सकती है.
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एसकेटी/
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